Wednesday, June 25, 2014

हल्बी बोली का एक पाठ --3-- हाग

आज हल्बी बोली का एक पाठ --3-- हाग
हुन हाग दयेसे - हुन हाग दयेदे--हुन मन हाग देसोत 
वह बुला रहा है- वह बुलाएगा --वे बुला रहे हैं  
हाग देना = बुलाना 

हल्बी बोली का पाठ--2--"गोंदा"

  • आज हल्बी बोली का एक पाठ --2--"गोंदा" हल्बी का एक शब्द -"गोंदा"
    ''गोंदा ,(गोंदी) '' इस शब्द को छत्तीसगढ़ी में गेंदे के फूल से लिया जाता है जैसे हम कहेंगे गोंदा फूल , चंदैनी गोंदा ----मगर हल्बी बोली में गोंदा का अर्थ तुकडे से लिया जाता है जैसे --- दरपन मेरे हाथ से गिरकर गोंदा-गोंदा (गोंदी-गोंदी) हो गया ----साथ ही गेंदे के फूलके परिप्रेक्ष्य में भी इस शब्द को लिया जाता है किन्तु गेंदे के फूल के साथ गोंदा फूल यानि फूल शब्द का इस्तेमाल अक्सर करते हैं|

हल्बी बोली का पाठ--1--''बायले''


  • हल्बी बोली का पाठ--1-- ''बायले''

  • क्या आपको पता है बस्तर में स्त्री को क्या कहा जाता है जैसे 'नारी' 'स्त्री' 'महिला' वैसे ही वहां स्त्री को ''बायले'' कहा जाता है |-

Sunday, June 22, 2014

''सूरज'' कविता

''सूरज''
सूरज
प्रकृति को अपने अंक में समेट कर 
भोर मुहाने आ खड़ा होता है 
हर दिन 
उसकी किरनें उतरने लगती हैं जब 
आँखों में 
हौले-हौले पंछी अपने पर फड़फड़ाते हैं 
हल-बैल ले किसान खेतों की और जाता है 
दूर कहीं से मंदिर से घंटियों की 
आती आवाजें
तब कोई शीतल हवा का झोंका
चुपके चुपके आकर मेरे कानों में कहता है
एरी सखी!
तू क्यूँ अब तक गुमसुम सी पड़ी है
उठ!
आजा
आज का नया दिन
तेरे स्वागत में पलक पावड़े बिछाये
तेरा इंतज़ार कर रहा है ----शकुंतला तरार

Thursday, June 12, 2014

''चित्रकोट'' का जल प्रपात

 बस्तर में स्थित पर्यटन स्थल चित्रकोट का जलप्रपात   





chitrakot   भारत का सबसे बड़ा जलप्रपात ''चित्रकोट'' छत्तीसगढ़ के बस्तर में स्थित है उसी जल धारा  के सामने तस्वीर खिंचवाती मैं।...जलप्रपात की सुन्दरता को और प्रकृति के इस विहंगम दृश्य को देखकर मन करता था वहीँ घंटों बैठी रहूँ और प्रकृति पर गीत लिखती रहूँ ...  पर्यटन की दृष्टि से छत्तीसगढ़ अत्यंत समृद्ध है... इससे पहले मैंने विश्व प्रसिद्द कुटुमसर की गुफा से अपने फेसबुक के मित्रो को परिचित कराया था अब चित्रकोट का यह जलप्रपात ..बारिश के दिनों में इसकी जलधाराएँ  पूरे शवाब पर होती हैं  ..शकुंतला तरार 

''बन कैना'' शकुंतला तरार

माँ शारदे की वंदना के साथ ही प्रस्तुत है बन कैना के छत्तीसगढ़ी गीतों का सफ़र--

( कृपया कास को कस पढ़ें )





Wednesday, June 11, 2014

बन कैना काव्य संग्रह शकुंतला तरार

छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद एक महिला साहित्यकार द्वारा प्रकाशित   प्रथम काव्य संग्रह बन कैना ---
इस कवर पेज के बाद कल से कोशिश रहेगी कि प्रतिदिन एक कविता इसी पुस्तक की आप सब के लिए प्रकाशित कर सकूँ