आज हल्बी बोली का एक पाठ --2--"गोंदा"हल्बी का एक शब्द -"गोंदा"
''गोंदा ,(गोंदी) '' इस शब्द को छत्तीसगढ़ी में गेंदे के फूल से लिया जाता है जैसे हम कहेंगे गोंदा फूल , चंदैनी गोंदा ----मगर हल्बी बोली में गोंदा का अर्थ तुकडे से लिया जाता है जैसे --- दरपन मेरे हाथ से गिरकर गोंदा-गोंदा (गोंदी-गोंदी) हो गया ----साथ ही गेंदे के फूलके परिप्रेक्ष्य में भी इस शब्द को लिया जाता है किन्तु गेंदे के फूल के साथ गोंदा फूल यानि फूल शब्द का इस्तेमाल अक्सर करते हैं|
''सूरज'' सूरज प्रकृति को अपने अंक में समेट कर भोर मुहाने आ खड़ा होता है हर दिन उसकी किरनें उतरने लगती हैं जब आँखों में हौले-हौले पंछी अपने पर फड़फड़ाते हैं हल-बैल ले किसान खेतों की और जाता है दूर कहीं से मंदिर से घंटियों की आती आवाजें तब कोई शीतल हवा का झोंका चुपके चुपके आकर मेरे कानों में कहता है एरी सखी! तू क्यूँ अब तक गुमसुम सी पड़ी है उठ! आजा आज का नया दिन तेरे स्वागत में पलक पावड़े बिछाये तेरा इंतज़ार कर रहा है ----शकुंतला तरार
chitrakot भारत का सबसे बड़ा जलप्रपात ''चित्रकोट'' छत्तीसगढ़ के बस्तर में स्थित है उसी जल धारा के सामने तस्वीर खिंचवाती मैं।...जलप्रपात की सुन्दरता को और प्रकृति के इस विहंगम दृश्य को देखकर मन करता था वहीँ घंटों बैठी रहूँ और प्रकृति पर गीत लिखती रहूँ ... पर्यटन की दृष्टि से छत्तीसगढ़ अत्यंत समृद्ध है... इससे पहले मैंने विश्व प्रसिद्द कुटुमसर की गुफा से अपने फेसबुक के मित्रो को परिचित कराया था अब चित्रकोट का यह जलप्रपात ..बारिश के दिनों में इसकी जलधाराएँ पूरे शवाब पर होती हैं ..शकुंतला तरार
छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद एक महिला साहित्यकार द्वारा प्रकाशित प्रथम काव्य संग्रह बन कैना --- इस कवर पेज के बाद कल से कोशिश रहेगी कि प्रतिदिन एक कविता इसी पुस्तक की आप सब के लिए प्रकाशित कर सकूँ