Sunday, July 20, 2014

काव्य संध्या की अध्यक्षता की





छत्तीसगढ़ हिंदी साहित्य मंडल द्वारा आयोजित काव्य संध्या की अध्यक्षता करते हुए  साथ में मुख्य अतिथि डॉ. शिला गोयल एवं संस्था के अध्यक्ष इंजी. अमरनाथ त्यागी जी 

Thursday, July 17, 2014

=सवनाही गीत = ''झिमिर-झिमिर झिमी बरसे बदरिया''

रिमझिम रिमझिम बारिश का सुहाना सफ़र ---अभी तुरंत ही एक छत्तीसगढ़ी गीत लिखा है आप सबके लिए --''शकुंतला तरार''           =सवनाही गीत =''झिमिर-झिमिर झिमी बरसे बदरिया'' 

झिमिर-झिमिर झिमी बरसे बदरिया टप-टप-टप पानी बरसत हे बरसत हे, बरसत हे, पानी बरसत हे झूमत हे पवन, कुलकत सब्बो झिन झूमत हे पवन, कुलकत सब्बो झिनखेत-खार मा, फसल झूमे, गाये सवनाही गान खोर गली हा चिखलाए, नंदिया बोहे उफान ददा गा दाई वो, भाई गा बहिनी वोममा दाई फूफू दाई बूढी दाई वो

1-किसम-किसम के फूल फूलत हे नाचत हे मधुबन नवा-नवा सब जामत हे कोला बारी मगन आवो जम्मो गावो जम्मो जुरमिल गीत ददरिया झूमत हे पवन, कुलकत सब्बो झिनझूमत हे पवन, कुलकत सब्बो झिनददा गा दाई वो, भाई गा बहिनी वोममा दाई फूफू दाई बूढी दाई वो

2--हमर कला अउ हमर संस्कृति ला, सगरी दुनिया जानिस कोस-कोस मा बोली-भाखा, माहात्तम ला चीन डारिस एला कहिथें, जम्मो झिन, कोसल देस के मनखे अन झूमत हे पवन, कुलकत सब्बो झिनझूमत हे पवन, कुलकत सब्बो झिन ददा गा दाई वो, भाई गा बहिनी वोममा दाई फूफू दाई बूढी दाई वोझूमत हे पवन, कुलकत सब्बो 

Monday, July 14, 2014

हल्बी बोली की पाठशाला---6---शकुंतला तरार --गेलो शब्द

हल्बी बोली की पाठशाला---6---शकुंतला तरार 
गेलो = आया , गेलोसे = गया है , जाएदे= जाएगा 
तूचो बूबा गेलो = तुम्हारे पिता गए
तूचो बूबा गेलोसे = तुम्हारे पिता गए हैं
तूचो बूबा जायेदे = तुम्हारे पिता जायेंगे 

तूचो बूबा गेलो ?= तुम्हारे पिता गए ?
तूचो बूबा गेलोसे ?= तुम्हारे पिता गए हैं ?
तूचो बूबा जायदे ? = तुम्हारे पिता जायेंगे ?
सम्मानसूचक शब्द--
तूमचो बूबा गेला = तुम्हारे पिता गए
तूमचो बूबा गेलासत = तुम्हारे पिता गए हैं
तूमचो बूबा जादे = तुम्हारे पिता जायेंगे
यहाँ स्त्रीलिंग के लिए ''गेली'' शब्द लगेगा

हल्बी बोली की पाठशाला---5---शकुंतला तरार- इला शब्द

हल्बी बोली की पाठशाला---5---शकुंतला तरार 

इलो = आया , इलोसे = आ गया है , अयेदे=आएगा 
तूचो बूबा इलो = तुम्हारे पिता  आए
तूचो बूबा इलोसे = तुम्हारे पिता  आ गए हैं
तूचो बूबा अयेदे  = तुम्हारे पिता आयेंगे   
तूचो बूबा इलो ?=  तुम्हारे पिता  आए ?
तूचो बूबा इलोसे ?= तुम्हारे पिता  आ गए हैं ?
तूचो बूबा अयेदे ? = तुम्हारे पिता आयेंगे ?
तूमचो बूबा इला  = तुम्हारे पिता  आए
तूमचो बूबा इलासत  = तुम्हारे पिता  आ गए हैं

तूमचो बूबा एदे   = तुम्हारे पिता आयेंगे

Saturday, July 12, 2014

एक गीत --मेघ फिर मुकर गए,

आज सावन का पहला दिन है और बादल पता नहीं कहाँ चले गए हैं- रूठे-रूठे से लग रहे हैं इस बार --हमने ही तो प्रकृति के  विनाश करने का ठेका ले रखा है  ------
एक गीत आप सबके लिए ----
कैसी यह सृष्टि हुई मानव मन तड़प रहा
प्रकृति से छेड़छाड़ उसके लिए सबक बना ||
मेघ फिर मुकर गए, पवन ठहर-ठहर गए
शाखों के पात सभी, फिर हहर-हहर गए
जलद पास  आकर भी, घुमड़ कर चले गए
दामिनी दमक-दमक, चमक दिखा चली गई
चातक भी प्यासा है, पवन टार नहीं हुए
दादुर झींगुर भी मौन, व्रत वरन-वरन किए
बुझ न पाई प्यास अभी, ताल नहीं भर पाए
डूबा नहीं पनघट और, जाल नहीं खुल पाए
शंख भी सहम गए, सीप मोती चुग गए
घोंघे फिर घूम-घूम, कर लहर-लहर गए ---शकुंतला तरार

Sunday, June 29, 2014

हल्बी बोली की पाठशाला---4--शकुंतला तरार - दागा

हल्बी बोली की पाठशाला---4--शकुंतला तरार 
शब्द- दागा = दागा देना =क्रोध से चिल्लाना 
दागा दिलो --- दागा दयेसे --- दागा दयेदे 
क्रोध से चिल्लाया- ---क्रोध कर रहा है ---क्रोध करेगा
सरल भाषा में कहें तो 
गाली दिया --गाली दे रहा है --गाली देगा (रहा है या रही है , देगा या देगी दोनों चलता है =उभयलिंग)

कवि गोष्ठी की अध्यक्षता की


मेघ फिर मुकर गए , पवन ठहर ठहर गए 
शाखों के पात सभी, फिर हहर हहर गए
 इन पंक्तियों के साथ ही आसाढ़ में  सूखे की स्थिति पर काव्य पाठ कर के कार्यक्रम की अध्यक्षता की  शकुंतला तरार ने उक्त अवसर था छत्तीसगढ़  हिंदी  साहित्य मंडल रायपुर  द्वारा आयोजित पावस की काव्य संध्या का ---कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डॉ. शीला गोयल , विशिष्ट अतिथि शंकरलाल श्रीवास्तव ,इंजी. अमरनाथ त्यागी हिंदी  साहित्य मंडल के अध्यक्ष, के आलावा लतिका भावे सैयद नासिर अली, सुशील  भोले, राजेन्द्र पांडे, राज कुमार मसंद के आलावा शहर के बहुत  से कवि  श्रोता उपस्थित थे-- सञ्चालन किया उर्मिला उर्मि ने.