Friday, January 23, 2015

समाज गौरव प्रकाशन रायपुर छत्तीसगढ़ द्वारा सामजिक,साहित्यिक, सांस्कृतिक,तथा रचनात्मक कार्यों के तारतम्य में अभिनन्दन समारोह भिलाई के करमा विद्यालय के सभागार में संपन्न हुआ . समारोह के सारस्वत अध्यक्ष आचार्य श्री सुकृत दास शास्त्री जी महंत कबीर आश्रम सेलूद के करकमलों से सम्मान पत्र शाल ग्रहण करते हुए साथ में अभिनेता शिवकुमार दीपक, एवंकार्यक्रम का सफल 
संचालन करते हुए डॉ सुखदेवराम साहू ''सरस ''.

बस्तर -गीत -3-हल्बी कविता -बूटी- कविता संग्रह टेपारी से

''बूटी''हल्बी कविता  मेरे काव्य संग्रह टेपारी से लिया गया है इसमें माँ की ममता का सुखद चित्रण किया गया है 

''बूटी ''

बूटी हांडा 
फ़क़त घोंडरते रएसे 
कुधुर ने 
जुड़ी चो दिन 
पायं हात  सोजे चड़पा झूमली 
केभे जायसे राहेड़ बूटा खाले 
केभय तिल पेटतो बाटे 
आया के हेंडस करून खाई खाजा मांगे 
नाहाले घोंडरून घोंडरून गागे 
आया अये 
दोंदो के कोरा ने धरे 
चोक्कस नांय ले टोंड के चूमे 
आरू 
भीतरे नेउन 
संगालो केसूर के 
दूय ठान धराऊन दये
बूटी हांडा हरीक होये 
आया के सरग चो सुख दीखे ........|
शकुंतला तरार 

Thursday, January 15, 2015

जल,जंगल,जमीन हमारा नहीं


रायपुर /16-01-2015 / नई दुनिया समाचार पत्र में आज छपी यह  खबर  कुछ लोगों के लिए आश्चर्य की बात हो सकती है तो कई इसे सरसरी तौर  पर देखकर आगे बढ़ जायेंगे मगर, बस्तर के लिए यह नई बात नहीं है वहां तो सालों  से यही होता आ रहा है अब तो स्थिति यह है कि कुछ सालों बाद आप हल्बी को यह कहते सुनें कि ''हम हल्बी बतियाँऊँसे''  कभी लगता है यह मारवाड़  है क्या ? तो कभी कोई अन्य प्रान्त . यह अच्छी बात है कि व्यापर के सिलसिले में या शासकीय सेवा के चलते स्थान बदलना ही पड़ता है किन्तु सच तो यह है कि जल ,जंगल ,जमीन पर केवल छत्तीसगढ़ के बाहर के लोगों का शासन है, कब्ज़ा है. व्यापारी  पढ़े लिखे हैं अफसरों से सांठगांठ के चलते ये अपना सारा काम आसानी से करा लेते हैं (सभी नंबरों वाले काम ) वहीँ स्थानीय लम्बी लाइन में धक्का खाने को मजबूर घंटों बैठे रहते हैं . जितने बड़े भवन मिलेंगे  इनके और इनमे काम करेंगे हमारे स्थानीय  बंधू-बांधव .   चाहे लालू के लाल हों या नितीश के नैतिक  सब एक ही थैले के चट्टे -बट्टे हैं  अनर्गल प्रलाप ही   कर सकते हैं ये .     वैसे भी छत्तीसगढ़ चारागाह बन चुका है   अब  छत्तीसगढ़ ही अपराधियों  की शरणस्थली  है . आज से चालीस साल पहले ही हमने कोरंडम की तस्करी करते सुना था  सोचिये चालीस साल का समय कम नहीं होता तीस साल तो कांग्रेस का ही शासन था मुझे तो ऐसा लगता है कि छत्तीसगढ़िया (बस्तरिया) सिर्फ शोषित होने के लिए पैदा हुआ है 



ये हैं दिल्ली की नई मुख्य मंत्री

ये हैं दिल्ली की नई मुख्य मंत्री--- क्यों सही कहा न? बिलकुल मुख्यमंत्री ही लग रही हैं --यह हम महिलाओं के लिए गर्व की बात होगी मैं जल्दबाज़ी में नहीं कह रही हूँ बल्कि यह हकीक़त है जब दिल्ली की सरकार चली नहीं उसी दिन से कह दिया था और शायद मैंने कहीं लिखा भी है इस बात को --

Tuesday, January 13, 2015

गीत-मया के सपना -छत्तीसगढ़ी गीत

छत्तीसगढ़ी गीत  

मया के सपना 
मया के अंगना मा आँखी मा सपना हे 
चार दिन के जिनगी असीस के झुलना हे 

1---- धीरज के चंदा हर जीव ला जुडावत हे 
अमावस के  अंधियारी मा नवा बिहनिया हे 
सुरुज के भरम मा जिनगी के गीत हे 
चार दिन के जिनगी असीस के झुलना हे 

2---झिन तयं पोटा रबे चिंता  के गठरी  
रद्दा भुलाए सुख कभू तो लहूँटही 
मन तोर डोलय  जईसे पीपरा  के पान हे 
चार दिन के जिनगी असीस के झुलना हे 

3---आसा के डोर ला झिन तयं बुचकाबे
मया के फुंदराला कस के गठियाबे
दुनिया हे सतरंगी बादर हे घाम हे
चार दिन के जिनगी असीस के झुलना हे  

Saturday, January 10, 2015

सुनता है गुरु ज्ञानी .....संत कबीर के भजन

सुनता है गुरु ज्ञानी .....संत कबीर के भजन 

कोई सुनता है गुरु ज्ञानी गगन में,
आवाज हो रही झिनी झिनी - 
झीनी झीनी झीनी झीनी बिनी रे चदरिया  
पहिले  आये  नाद बिंदु से,
पीछे जमया पानी हो जी
सब घट पूरण बोली रह्या है,
अलख पुरुष निर्बानी हो जी - 1
 झीनी झीनी झीनी झीनी बिनी रे चदरिया 
वहां से आया पता लिखाया,
तृष्णा तौने बुझाई ..
अमृत छोडसो विषय को धावे,
उलटी फाँस फंसानी हो जी -2 
झीनी झीनी झीनी झीनी बिनी रे चदरिया 
गगन मंडलू में गौ भी आनी
भोई पे दही जमाया...
माखन माखन संतों ने खाया,
छाछ जगत बापरानी हो जी  -3 
झीनी झीनी झीनी झीनी बिनी रे चदरिया 
बिन धरती एक मंडल दीसे,
बिन सरोवर जूँ पानी रे
गगन मंडलू में होए उजियाला,
बोल गुरु-मुख बानी हो जी -4 
झीनी झीनी झीनी झीनी बिनी रे चदरिया 
ओऽहं सोऽहं बाजा बाजे,
त्रिकुटी धाम सुहानी रे 
इडा पिंगला सुखमन नारी,
सुनत भजन पहरानी हो जी -5 
झीनी झीनी झीनी झीनी बिनी रे चदरिया 
कहत कबीरा सुनो भई साधो,
जानी अगम के बानी रे..
दिन भर रे जो नज़र भर देखे,
अजर अमर वो निशानी हो जी -6
झीनी झीनी झीनी झीनी बिनी रे चदरिया 

Thursday, January 8, 2015

तीजन बाई और मैं

कल E-tv द्वारा छत्तीसगढ़ के लिए एक अभिनव काम किया गया और वह था शाम 6 बजे प्रतिदिन छत्तीसगढ़ी में समाचार का प्रसारण .. लांचिंग के अवसर पर विश्व प्रसिद्ध पद्मभूषण तीजन बाई द्वारा पंडवानी प्रस्तुत किया गया ..फुर्सत निकाल कर उनसे बातें करने और फोटो खिंचाने का लोभ संवरण नहीं कर पाई आखिर वो मेरे दोनों बच्चों संदीप,श्वेता की पंडवानी गुरु जो हैं ...