इस बार कोंडगांव में सबसे पहले मैं श्री हरिहर वैष्णव से मिली, जहां बस्तर के लोक साहित्य और लेखन को लेकर वृहत चर्चा हुई, दूसरे दिन शाम श्री यशवंत गौतम के घर पर पुनः सार्थक चर्चा हुई अगले दिन अचानक श्री चितरंजन रावल जी का मेरे यहाँ आगमन हुआ उन्होंने बड़े ही आदर के साथ कहा कि छत्तीसगढ़ हिन्दी साहित्य परिषद जिला कोडागांव ईकाई द्वारा मेरे सम्मान मे एक काव्य संध्या का आयोजन करना चाहते हैं मैंने अपना अन्य कार्यक्रम स्थगित कर उस गरिमामय आयोजन का हिस्सा बनना स्वीकार किया ...... कार्यक्रम का संचालन शुरू में मेरा परिचय देकर मेरे स्कूल के गुरु श्री सुरेन्द्र रावल अध्यक्ष छ॰ग॰ हिन्दी साहित्य परिषद ने किया बाद का संचालन कवयित्री बरखा भाटिया ने किया इस कार्यक्रम के अध्यक्ष श्री टी एस ठाकुर के अलावा डॉ॰ राजाराम त्रिपाठी, हरेन्द्र यादव,वरिष्ठ शायर हयात जी, यशवंत गौतम, के अलावा नगर के कवि-कवयित्री एवं प्रबुद्ध जन उपस्थित थे ॥यह मेरा सौभाग्य था कि मैं अपने ही मायके में बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित थी......डॉ। राजाराम त्रिपाठी द्वारा पुस्तकों और मोमेंटो से मेरा सम्मान किया गया.....
Saturday, May 9, 2015
Monday, April 27, 2015
महिला उत्पीड़न समिति में चयन
खुशी के पल--
कार्य स्थल पर महिला उत्पीड़न की रोकथाम हेतु अधिनियम 2013 के भाग -1- धारा -2- में निहित प्रावधान अनुसार छ॰ग॰ में भी शासन
स्तर पर समितियां गठित की गई हैं .... मित्रो हर्ष की बात है कि मेरा चयन जनसम्पर्क
संचालनालय छत्तीसगढ़ शासन (प्रदेश स्तरीय) की समिति ,जिला जनसम्पर्क
रायपुर (जिला स्तरीय )की समिति छत्तीसगढ़, के पश्चात ,
छ॰ ग॰ पाठ्य पुस्तक निगम (प्रदेश स्तरीय ) द्वारा गठित समिति में भी शामिल करके मेरा
सम्मान बढ़ाया है ।Thursday, April 16, 2015
Tuesday, March 3, 2015
बस्तर गीत -5
बस्तर गीत -5
बेलोसा
दिन निकलने के साथ ही
जाती है रयमति के घर
हाथ में उसके
एक टुकनी है
बगल में एक साल डेढ़ साल का बच्चा
बागा पाई है वो
रयमति भी वैसी ही टुकनी लेकर
निकलती है अपने घर से
अरे यही तो उनकी पूंजियों में से एक है
बाड़ी किनारे खड़े होकर
दोनों में थोड़ी देर कुछ बातचीत होती है
फिर चल देती है
वे दोनों
गाँव से बाहर
जाते- जाते -जाते चली जाती हैं
एक डोबरी के किनारे
फिर उस डोबरी के दलदल में उतरकर
करती हैं प्रयास
केसूर कांदा के लिए
कल
साप्ताहिक इतवार का बाजार है
कोंडागांव का
कुछ मिलेगा
तो नमक और कुछ जरुरी सामान भी लेना है
साथ में
बच्चे के लिए एक कमीज
ओह
दिन भर कीचड़ में
क्या परिश्रम है
और हम
उनसे मोल भाव करते हैं
चंद रुपयों के लिए ----शकुंतला तरार
बेलोसा
दिन निकलने के साथ ही
जाती है रयमति के घर
हाथ में उसके
एक टुकनी है
बगल में एक साल डेढ़ साल का बच्चा
बागा पाई है वो
रयमति भी वैसी ही टुकनी लेकर
निकलती है अपने घर से
अरे यही तो उनकी पूंजियों में से एक है
बाड़ी किनारे खड़े होकर
दोनों में थोड़ी देर कुछ बातचीत होती है
फिर चल देती है
वे दोनों
गाँव से बाहर
जाते- जाते -जाते चली जाती हैं
एक डोबरी के किनारे
फिर उस डोबरी के दलदल में उतरकर
करती हैं प्रयास
केसूर कांदा के लिए
कल
साप्ताहिक इतवार का बाजार है
कोंडागांव का
कुछ मिलेगा
तो नमक और कुछ जरुरी सामान भी लेना है
साथ में
बच्चे के लिए एक कमीज
ओह
दिन भर कीचड़ में
क्या परिश्रम है
और हम
उनसे मोल भाव करते हैं
चंद रुपयों के लिए ----शकुंतला तरार
Wednesday, February 25, 2015
Sunday, February 22, 2015
छत्तीसगढ़ी गीत -आमा मऊरागे -
''आमा मऊरागे''
आमा मऊरागे ना
कोयली आज कुहके आमा डारी मा
पींयर सरसों हरियर पाना
सरसों के फूल ह लिखत हे बाना
नदिया नरवा मा ना
मातगे हे चिखला आमा डारी मा
आमा मऊरागे ना
कोयली आज कुहके आमा डारी मा
मया जोरे के दिन ये आये
नाता मितानी के दिन ये आये
मया पीरित ह ना
जीव लेवा होगे आमा डारी मा
आमा मऊरागे ना
कोयली आज कुहके आमा डारी मा
Wednesday, February 11, 2015
गीत - जवान
" जवान"
इस देश की आन-बान-शान हैं जवान,
सिख-ईसाई-हिन्दू-मुसलमान हैं जवान ||
लहराता है परचम दुनिया और देश में,
ये नींव हैं इस देश का अभिमान हैं जवान ||
देश की आन को सीमा पर डटे हुये,
राष्ट्र की उन्नति का वरदान हैं जवान ||
स्वर्णाक्षरों में नाम है देश के इतिहास में,
सरहद के ये प्रहरी हैं निगहबान हैं जवान ||शकुंतला तरार ||
इस देश की आन-बान-शान हैं जवान,
सिख-ईसाई-हिन्दू-मुसलमान हैं जवान ||
लहराता है परचम दुनिया और देश में,
ये नींव हैं इस देश का अभिमान हैं जवान ||
देश की आन को सीमा पर डटे हुये,
राष्ट्र की उन्नति का वरदान हैं जवान ||
स्वर्णाक्षरों में नाम है देश के इतिहास में,
सरहद के ये प्रहरी हैं निगहबान हैं जवान ||शकुंतला तरार ||
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