Sunday, August 2, 2015

मितान -(मातृभूमि के लिए किसान का आह्वान करता यह गीत)

(मातृभूमि के लिए किसान का आह्वान करता यह गीत(
मितान 
सुनव-सुनव ग मोर मितान 
आवव आवव हो मोर मितान
देखाव देखाव गए मोर मितान
छत्तीसगढ़िया  बनिहार किसान ||

·        ए माटी ए माटी ए चोवा चंदन
मनखे करथे एला बंदन
जघा-जघा मा मंदिर देवाला 
 किसिम-किसिम के भाजी-पाला
मन ल मोहाये पुरईनपान 
छत्तीसगढ़िया बनिहार किसान||

·       गुरतुर-गुरतुर भाखा-बोली 
लागय जईसे मंदरस घोरी 
रामगिरि ले दंतेवाड़ा अउ
रायगढ़ ले खैरागढ़ तक
ओरी-ओरी सब्बो हे ठान 

छत्तीसगढ़िया बनिहार किसान||

Tuesday, June 23, 2015

तोर मया

एक छत्तीसगढ़ी रचना - तोर मया


Sunday, June 14, 2015

नारी का संबल- जनवरी-मार्च -2015


नारी का संबल- जनवरी-मार्च -2015 
त्रैमासिक पत्रिका ''नारी का संबल'' साहित्य की समस्त विधाओं से परिपूर्ण पत्रिका है जो विगत चौदह सालों से (जुलाई-सितंबर 2001) छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से निरंतर प्रकाशित हो रही  है जो एक महिला संपादक द्वारा विभिन्न कठिनाइयों को पार करते हुए भी निरंतरता को बनाए हुए है ।  पत्रिका का यह अंक रायपुर साहित्य महोत्सव पर केन्द्रित अंक है आशा है आप सब के लिए यह नया अनुभव होगा और  बहुत पसंद आएगी - शकुंतला तरार