Thursday, August 25, 2016
Tuesday, April 26, 2016
Monday, April 25, 2016
ग़ज़ल-जान पाएगा तो कह देगा कहानी की वजह
ग़ज़ल----
जान पाएगा तो कह देगा कहानी
की वजह
“खुद से पूछेगा कभी इस
बदगुमानी की वजह” ||
मिलते हैं छुप-छुप के आशिक
प्यार की आगोश में
सुरमई सँझा की ढलती
दरमियानी की वजह ||
छल कपट का दंश जग की रीत बनकर
रह गई
तुम चलो जैसे हो नदिया की
रवानी की वजह ||
क्यूँ भटकता फिर रहा वह व्योम
में पंछी बना
ज़िंदगी सा धन मिला है तत्वज्ञानी की वजह ||
देश सेवा से बड़ी सेवा नहीं ऐ
ज़िंदगी
वो हिमालय बन गया है निगहबानी
की वजह ||
चैन से हम सो रहे सरहद पे
मुस्तैदी बढ़ी
है नमन ऐ वीरों तुम हो
जिंदगानी की वजह ||
शकुंतला तरार
Tuesday, March 29, 2016
“बस्तर की नारी”
“बस्तर की नारी”
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस
8 मार्च
पार्लर से निकली
लिपी-पुती कुछ महिलाएं
बड़े-बड़े आयोजनों का हिस्सा बनतीं
मोमेंटो, कागज का सम्मान पत्र
उपलब्धि के कुछ लाईन
समाज सेवा के खोखले उदाहरण ---
बस्तर के बीहड़ों में
कभी नक्सल के नाम पर
जूझती मारी जाती
नारी
कभी नक्सलियों के हाथों
मारी जाती नारी
किस आयोजन का हिस्सा बनेंगीं
कौन से सम्मान पत्र पर
लिखा जाएगा इनका नाम
अब के
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर ||
शकुंतला तरार -- 30-03-2016
Subscribe to:
Posts (Atom)






