Monday, August 24, 2015

दोहा -

एक दोहा मित्रों को समर्पित 


Wednesday, August 12, 2015

मुक्तक - यादें


एक रचना आज की --




मैं मधु हो जाता हूँ-मुक्तक


अभी ताजी रचना आप सब के लिए ----------- 11-08-2015 
फूल- फूल से रस ले लेकर मैं मधु हो जाता हूँ
हर पराग से पूछो कितना दर्द उन्हें दे जाता हूँ 
किन्तु मानव लेता मुझसे मेरे परिश्रम का सब कुछ 
करता वही वार जब मुझपर क्रोधित मैं हो जाता हूँ 
शकुंतला तरार ---फोटो (मनेन्द्रगढ़ जिला कोरिया)
shakuntalatarar7@gmail.com



एक मुक्तक ख़ास अंदाज़ में

एक मुक्तक ख़ास अंदाज़ में


Sunday, August 2, 2015

मितान -(मातृभूमि के लिए किसान का आह्वान करता यह गीत)

(मातृभूमि के लिए किसान का आह्वान करता यह गीत(
मितान 
सुनव-सुनव ग मोर मितान 
आवव आवव हो मोर मितान
देखाव देखाव गए मोर मितान
छत्तीसगढ़िया  बनिहार किसान ||

·        ए माटी ए माटी ए चोवा चंदन
मनखे करथे एला बंदन
जघा-जघा मा मंदिर देवाला 
 किसिम-किसिम के भाजी-पाला
मन ल मोहाये पुरईनपान 
छत्तीसगढ़िया बनिहार किसान||

·       गुरतुर-गुरतुर भाखा-बोली 
लागय जईसे मंदरस घोरी 
रामगिरि ले दंतेवाड़ा अउ
रायगढ़ ले खैरागढ़ तक
ओरी-ओरी सब्बो हे ठान 

छत्तीसगढ़िया बनिहार किसान||