Thursday, October 15, 2015

कवि सम्मलेन --

रायपुर विधान सभा आवासीय परिसर में कवि सम्मलेन --
कल का दिनहमारे लिए बहुत अनमोल और बहुत ही अविस्मरनीय रहा |आदरणीय देवेन्द्र वर्मा जी के मुख्य आतिथ्य में विधान सभा आवासीय परिसर में दुर्गा उत्सव के दूसरे दिन उत्सव समिति द्वारा कवि सम्मलेन का आयोजन किया| कार्यक्रम की अध्यक्षता की श्री गंगराड़े जी ने कवियों में सर्वश्री चेतन भारती,सुशील भोले, भवानी शंकर बेगाना, राजेंद्र पांडे, राजेश चौहान, क्रांति दीक्षित और मैं शकुंतला तरार





Thursday, October 8, 2015

महिलाओं का कार्य स्थल पर लैंगिक उत्पीडन समिति की बैठक


महिलाओं का कार्य स्थल पर लैंगिक उत्पीडन समिति की बैठक 
महिलाओं का कार्य स्थल पर लैंगिक उत्पीडन (निवारण,प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम 2013 के अंतर्गत आतंरिक शिकायत  निवारण समिति की बैठक  राज्य शासन के जनसंपर्क संचालनालय में मंगलवार को आयोजित की गई | बैठक में अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों पर चर्चा की गई बताया गया कि इस अधिनियम के अंतर्गत जनसंपर्क संचालनालय और राज्य के 27 जिलों में स्थित जिला जनसंपर्क कार्यालयों से कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है बैठक में आंतरिक निवारण की अध्यक्ष संयुक्त संचालक हेशा पौराणिक, संयुक्त संचालक, जमुना सांडिया, उपाध्यक्ष पुष्प वर्मा, तौकीर जाहिद, सुनीता केशरवानी आमना,प्रतिभा केएवं विभागीय महिला कर्मचारियों के  साथ ही ---अशासकीय सदस्य के रूप में मेरी मौजूदगी(शकुंतला तरार) उल्लेखनीय रही|

Monday, August 24, 2015

दोहा -

एक दोहा मित्रों को समर्पित 


Wednesday, August 12, 2015

मुक्तक - यादें


एक रचना आज की --




मैं मधु हो जाता हूँ-मुक्तक


अभी ताजी रचना आप सब के लिए ----------- 11-08-2015 
फूल- फूल से रस ले लेकर मैं मधु हो जाता हूँ
हर पराग से पूछो कितना दर्द उन्हें दे जाता हूँ 
किन्तु मानव लेता मुझसे मेरे परिश्रम का सब कुछ 
करता वही वार जब मुझपर क्रोधित मैं हो जाता हूँ 
शकुंतला तरार ---फोटो (मनेन्द्रगढ़ जिला कोरिया)
shakuntalatarar7@gmail.com



एक मुक्तक ख़ास अंदाज़ में

एक मुक्तक ख़ास अंदाज़ में


Sunday, August 2, 2015

मितान -(मातृभूमि के लिए किसान का आह्वान करता यह गीत)

(मातृभूमि के लिए किसान का आह्वान करता यह गीत(
मितान 
सुनव-सुनव ग मोर मितान 
आवव आवव हो मोर मितान
देखाव देखाव गए मोर मितान
छत्तीसगढ़िया  बनिहार किसान ||

·        ए माटी ए माटी ए चोवा चंदन
मनखे करथे एला बंदन
जघा-जघा मा मंदिर देवाला 
 किसिम-किसिम के भाजी-पाला
मन ल मोहाये पुरईनपान 
छत्तीसगढ़िया बनिहार किसान||

·       गुरतुर-गुरतुर भाखा-बोली 
लागय जईसे मंदरस घोरी 
रामगिरि ले दंतेवाड़ा अउ
रायगढ़ ले खैरागढ़ तक
ओरी-ओरी सब्बो हे ठान 

छत्तीसगढ़िया बनिहार किसान||