Wednesday, July 5, 2017
Tuesday, February 28, 2017
Thursday, December 22, 2016
साहित्य अकादमी का भाषा सम्मान
श्री हरिहर वैष्णव को साहित्य अकादमी का भाषा सम्मान ------बधाई
कथाकार एवं कवि मूलसृजन कर्म केवल बस्तर पर केन्द्रित बस्तर की लोकभाषाओं (हल्बी, भतरी एवं बस्तरी) के जानकार श्री हरिहर वैष्णव को साहित्य अकादमी दिल्ली का भाषा सम्मान --
आपकी प्रकाशित कृतियों में से हैं -1-मौखिक कथाएँ (लोक साहित्य, बस्तर की विभिन्न लोकभाषाओं की लोक कथाएँ उनके हिन्दी अनुवाद के साथ, बस्तर सम्भाग हल्बी साहित्य परिषद्, कोंडागाँव, 1991), 02. मोहभंग (कहानी-संग्रह, राष्ट्रीय प्रकाशन मन्दिर, लखनऊ, 1997), 03. राजा और बेल कन्या (लोक साहित्य, हल्बी लोक कथा का हिन्दी अनुवाद, साक्षरता समिति, दुर्ग, 1998), 04. चलो, चलें बस्तर (बाल साहित्य, हिन्दी, बस्तर सम्भाग हल्बी साहित्य परिषद्, कोंडागाँव, 2002), 05. बस्तर के तीज-त्यौहार (बाल साहित्य, हिन्दी, बस्तर सम्भाग हल्बी साहित्य परिषद्, कोंडागाँव, 2002), 06. गुरुमाय सुकदई कोराम द्वारा प्रस्तुत लछमी जगार (लोक साहित्य, बस्तर के लोक महाकाव्य का संक्षेपित संस्करण, हल्बी-हिन्दी-अँग्रेजी में, ककसाड़ प्रकाशन, कोंडागाँव, 2003), 07. बस्तर का लोक साहित्य (लोक साहित्य, बस्तर की विभिन्न लोकभाषाओं का लोक साहित्य उनके हिन्दी अनुवाद के साथ, ककसाड़ प्रकाशन, कोंडागाँव, 2003), 08. बस्तर की गीति कथाएँ (लोक साहित्य, बस्तर की विभिन्न लोकभाषाओं की गीति कथाएँ उनके हिन्दी अनुवाद के साथ, बस्तर सम्भाग हल्बी साहित्य परिषद्, कोंडागाँव, 2004), 09. गुरुमाय केलमनी द्वारा प्रस्तुत धनकुल (लोक साहित्य, बस्तर का लोक महाकाव्य, मूल हल्बी एवं हिन्दी अनुवाद, बस्तर सम्भाग हल्बी साहित्य परिषद्, कोंडागाँव, 2008), 10. बस्तर के धनकुल गीत (लोक साहित्य पर शोध विनिबन्ध, दक्षिण-मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, नागपुर, 2008), 11. बस्तर की लोक कथाएँ (लोक साहित्य, बस्तर की विभिन्न लोकभाषाओं की लोक कथाएँ उनके हिन्दी अनुवाद के साथ, नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया, नयी दिल्ली, 2013, 2014), 12. बस्तर का आदिवासी एवं लोक संगीत (लोक संस्कृति, बस्तर की विभिन्न लोकभाषाओं के लोक गीत उनके हिन्दी अनुवाद के साथ, नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया, नयी दिल्ली, 2013, 2015), 13. साहित्य ऋषि लाला जगदलपुरी : लाला जगदलपुरी समग्र (यश पब्लिकेशन्स, नयी दिल्ली, 2014), 14. बस्तर की आदिवासी एवं लोक हस्तशिल्प परम्परा (राधाकृष्ण प्रकाशन, नयी दिल्ली, 2014), 15. धातुशिल्पी डॉ. जयदेव बघेल : एक शिखर यात्रा (लोक कलाकार की जीवनी, राधाकृष्ण प्रकाशन, नयी दिल्ली, 2014), 16. तीजा जगार (लोक साहित्य, मूल हल्बी एवं हिन्दी अनुवाद, भारतीय ज्ञानपीठ, नयी दिल्ली, 2014), 17. सुमिनबाई बिसेन द्वारा प्रस्तुत छत्तीसगढ़ी लोक गाथा : धनकुल (लोक साहित्य, मूल छत्तीसगढ़ी के साथ हिन्दी अनुवाद, छत्तीसगढ़ राज्य हिन्दी ग्रन्थ अकादमी, रायपुर, 2014), 18. बस्तर की भतरी लोक कथाएँ (लोक साहित्य, मूल भतरी के साथ हिन्दी अनुवाद, नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया, नयी दिल्ली, 2015), 19. गुरुमाय केलमनी द्वारा प्रस्तुत बस्तर की धान्य-देवी की महागाथा : लछमी जगार (लोक साहित्य, मूल हल्बी के साथ हिन्दी अनुवाद, साहित्य अकादेमी, नयी दिल्ली, 2015), 20. अन्धकार का देश (श्री सोनसिंह पुजारी की हल्बी कविताओं का हिन्दी अनुवाद मूल सहित, साहित्य अकादेमी, नयी दिल्ली, 2015)
कथाकार एवं कवि मूलसृजन कर्म केवल बस्तर पर केन्द्रित बस्तर की लोकभाषाओं (हल्बी, भतरी एवं बस्तरी) के जानकार श्री हरिहर वैष्णव को साहित्य अकादमी दिल्ली का भाषा सम्मान --
आपकी प्रकाशित कृतियों में से हैं -1-मौखिक कथाएँ (लोक साहित्य, बस्तर की विभिन्न लोकभाषाओं की लोक कथाएँ उनके हिन्दी अनुवाद के साथ, बस्तर सम्भाग हल्बी साहित्य परिषद्, कोंडागाँव, 1991), 02. मोहभंग (कहानी-संग्रह, राष्ट्रीय प्रकाशन मन्दिर, लखनऊ, 1997), 03. राजा और बेल कन्या (लोक साहित्य, हल्बी लोक कथा का हिन्दी अनुवाद, साक्षरता समिति, दुर्ग, 1998), 04. चलो, चलें बस्तर (बाल साहित्य, हिन्दी, बस्तर सम्भाग हल्बी साहित्य परिषद्, कोंडागाँव, 2002), 05. बस्तर के तीज-त्यौहार (बाल साहित्य, हिन्दी, बस्तर सम्भाग हल्बी साहित्य परिषद्, कोंडागाँव, 2002), 06. गुरुमाय सुकदई कोराम द्वारा प्रस्तुत लछमी जगार (लोक साहित्य, बस्तर के लोक महाकाव्य का संक्षेपित संस्करण, हल्बी-हिन्दी-अँग्रेजी में, ककसाड़ प्रकाशन, कोंडागाँव, 2003), 07. बस्तर का लोक साहित्य (लोक साहित्य, बस्तर की विभिन्न लोकभाषाओं का लोक साहित्य उनके हिन्दी अनुवाद के साथ, ककसाड़ प्रकाशन, कोंडागाँव, 2003), 08. बस्तर की गीति कथाएँ (लोक साहित्य, बस्तर की विभिन्न लोकभाषाओं की गीति कथाएँ उनके हिन्दी अनुवाद के साथ, बस्तर सम्भाग हल्बी साहित्य परिषद्, कोंडागाँव, 2004), 09. गुरुमाय केलमनी द्वारा प्रस्तुत धनकुल (लोक साहित्य, बस्तर का लोक महाकाव्य, मूल हल्बी एवं हिन्दी अनुवाद, बस्तर सम्भाग हल्बी साहित्य परिषद्, कोंडागाँव, 2008), 10. बस्तर के धनकुल गीत (लोक साहित्य पर शोध विनिबन्ध, दक्षिण-मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, नागपुर, 2008), 11. बस्तर की लोक कथाएँ (लोक साहित्य, बस्तर की विभिन्न लोकभाषाओं की लोक कथाएँ उनके हिन्दी अनुवाद के साथ, नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया, नयी दिल्ली, 2013, 2014), 12. बस्तर का आदिवासी एवं लोक संगीत (लोक संस्कृति, बस्तर की विभिन्न लोकभाषाओं के लोक गीत उनके हिन्दी अनुवाद के साथ, नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया, नयी दिल्ली, 2013, 2015), 13. साहित्य ऋषि लाला जगदलपुरी : लाला जगदलपुरी समग्र (यश पब्लिकेशन्स, नयी दिल्ली, 2014), 14. बस्तर की आदिवासी एवं लोक हस्तशिल्प परम्परा (राधाकृष्ण प्रकाशन, नयी दिल्ली, 2014), 15. धातुशिल्पी डॉ. जयदेव बघेल : एक शिखर यात्रा (लोक कलाकार की जीवनी, राधाकृष्ण प्रकाशन, नयी दिल्ली, 2014), 16. तीजा जगार (लोक साहित्य, मूल हल्बी एवं हिन्दी अनुवाद, भारतीय ज्ञानपीठ, नयी दिल्ली, 2014), 17. सुमिनबाई बिसेन द्वारा प्रस्तुत छत्तीसगढ़ी लोक गाथा : धनकुल (लोक साहित्य, मूल छत्तीसगढ़ी के साथ हिन्दी अनुवाद, छत्तीसगढ़ राज्य हिन्दी ग्रन्थ अकादमी, रायपुर, 2014), 18. बस्तर की भतरी लोक कथाएँ (लोक साहित्य, मूल भतरी के साथ हिन्दी अनुवाद, नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया, नयी दिल्ली, 2015), 19. गुरुमाय केलमनी द्वारा प्रस्तुत बस्तर की धान्य-देवी की महागाथा : लछमी जगार (लोक साहित्य, मूल हल्बी के साथ हिन्दी अनुवाद, साहित्य अकादेमी, नयी दिल्ली, 2015), 20. अन्धकार का देश (श्री सोनसिंह पुजारी की हल्बी कविताओं का हिन्दी अनुवाद मूल सहित, साहित्य अकादेमी, नयी दिल्ली, 2015)
Saturday, October 8, 2016
स्तम्भ लेखक संगोष्ठी-लखनऊ
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, प्रचार
विभाग
स्तम्भ लेखक संगोष्ठी
24-25 सितंबर
विषय:- भारत की भारतीय अवधारणा बनाम भारत की अभारतीय अवधारणा
लखनऊ/ राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ द्वारा आयोजित
स्तम्भ लेखक संगोष्ठी का उद्घाटन संघ के अखिल
भारतीय पदाधिकारियों, चिंतकों, विचारकों एवं
देश के विभिन्न भागों से आये हुए स्तम्भ
लेखकों की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ | उद्घाटन सत्र के दौरान जे नन्द कुमार जी
द्वारा कार्यक्रम में उपस्थित संघ के वरिष्ठ सम्मानित पदाधिकारियों का परिचय कराया
गया जिनमें सम्मानित अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य मार्गदर्शक मधुभाई कुलकर्णी जी, अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख डॉ.
मनमोहन वैद्य जी, मिलिंद जी, डॉ. प्रदीप कुठ्यागत जी, जगदीश उपासने जी, नरेंद्र
कुमार ठाकुर जी, नरेन्द्र जी प्रचार
प्रमुख मध्य क्षेत्र, छत्तीसगढ़, कृपाशंकर जी, राजेंद्र सक्सेना जी, प्रसन्न
देशपांडे जी, विनायक जी, सतीश जी आदि थे |
संगोष्ठी में राष्ट्र जागरण के निमित्त
समाज में जागरूकता किस तरह से लाया जाय आदि
तथ्यपरक बातों पर विचार करने के साथ ही आर्थिक, सामजिक संरचना, राजनैतिक, इतिहास
आदि अलग-अलग विषयों पर 8 सत्र हुए और लगभग
प्रति दो सत्रों के बाद प्रश्नोत्तरी का
कार्यक्रम भी रखा गया था जिससे आगंतुक स्तंभ लेखकों की जिज्ञासाओं का
समाधान किया जा सके|
कार्यक्रम के दौरान स्तम्भ लेखकों के
प्रचार विभाग द्वारा गत वर्ष जयपुर राजस्थान में आयोजित महिला विषयक भारतीय
दृष्टिकोण विषय पर केन्द्रित राष्ट्रीय संगोष्ठी में विद्वान और विदुषियों द्वारा
रखे गए विचारों को “संवर्धिनी” के नाम से पुस्तकाकार स्वरूप प्रदान किया गया था, का
विमोचन मंचस्थ अतिथियों द्वारा किया गया | पुस्तक का संपादन नरेंद्र ठाकुर जी ने
किया है, प्रकाशन विचार विनिमय नई दिल्ली ने किया है | कार्यक्रम में पत्रकारिता से जुड़े विभिन्न राज्यों से लगभग
250 से अधिक स्तम्भ लेखकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज की | कार्यक्रम का संचालन नन्द
कुमार जी ने किया | जय भारत , जय जननी, वन्दे
मातरम
शकुंतला तरार
प्लाट न- 32 , सेक्टर-2,
एकता नगर,
गुढ़ियारी,
रायपुर (छत्तीसगढ़) मो – 9425525681
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