Saturday, October 26, 2013
Friday, October 25, 2013
राष्ट्रीय किताब मेला में राज्य स्तरीय कवयित्री सम्मलेन संपन्न
टॉपर्स एजुकेशन सोसायटी द्वारा 18 से 28 अक्तूबर तक चलने वाले राष्ट्रीय किताब मेला में ---साहित्य की त्रैमासिक पत्रिका ''नारी का संबल'' द्वारा राज्य स्तरीय कवयित्री सम्मलेन का आयोजन किया गया था। कवयित्री सम्मलेन में प्रमुख रूप से शकुंतला तरार , लतिका भावे ,रेवा रानी मंडल, सीमा श्रीवास्तव, नीता श्रीवास्तव,मधु सक्सेना , गीता विश्वकर्मा, संध्या नलगुंडवार ने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों, श्रोताओं की खूब तालियाँ बटोरीं। श्रोताओं ने इस कार्यक्रम की बहुत सराहना की --कार्यक्रम का सफल सञ्चालन किया शकुंतला तरार ने ---।
इस कार्यक्रम की सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही की अब से प्रतिवर्ष राष्ट्रीय पुस्तक मेला में ''नारी का संबल'' के द्वारा कवयित्री सम्मलेन का आयोजन किया जावेगा और इसे अखिल भारतीय कवयित्री सम्मलेन का स्वरूप प्रदान किया जावेगा।
Tuesday, October 1, 2013
जन्म -2 अक्तूबर
हाजी हसन अली हसन
धानी धरती छत्तीसगढ़ जिस तरह अपनी हरियाली, अपनी खेती के लिए मशहूर है, वन, खनिज, प्राकृतिक संपदाओं से भरपूर है यहाँ का रहन-सहन,खान-पान, भाषा -बोली, हंसी-ठिठोली,लोक गीत, साहित्य संस्कृति पूरी दुनिया में प्रसिद्द है , ठीक उसी तरह हमारे यहाँ बहुत सारी महान विभूतियाँ हुईं जिनका मूल्याङ्कन छत्तीसगढ़ बनने के बाद से किया जा रहा है । ऐसे ही एक विभूति थे मुस्लिम संप्रदाय के रहनुमा हाजी हसन अली ।
आपने हमेशा कवियों एवं शायरों की हौसला अफजाई करते रहे । आप समझते थे की उर्दू केवल मुसलमानों की ज़बान नहीं बल्कि हिंदुस्तान की भी ज़बान है . आप वतन परस्ती और क़ौम की ख़िदमत में रहे उर्दू के लिए आजीवन फ़िक्रमंद रहे । आपके चार पुत्र और तीन पुत्रियाँ थीं ।
पुत्र इनायत अली छत्तीसगढ़ राज्य अल्प संख्यक आयोग के अध्यक्ष रहे ..और हाजी मोहसिन अली सुहैल अंतर्राष्ट्रीय शायर वरिष्ठ पत्रकार हैं और आपकी रचनाओं को समाज के आगे लेन का अभिनव कार्य कर रहे हैं । कहीं धूप कहीं छाँवऔर मिरास -ए -हसन आपकी ग़ज़लों,नज़्म,क़तआत,अशआर की दो किताबें उन्होंने प्रकाशित की है ।
छत्तीसगढ़ सरकार ने उर्दू अदब के प्रचार-प्रसार के लिए छत्तीसगढ़ के शायरों और अदीबों को हाजी हसन अली सम्मान से प्रतिवर्ष राज्य स्थापना दिवस पर दो लाख के सम्मान से सम्मानित करती है ।
आपके चंद अशआर, नज़्म ----
पैदा हुए हैं हम तो मोहब्बत के वास्ते
हम ज़िन्दगी लुटाएंगे भारत के वास्ते ।\
कौन जलवानुमा है तुम्हारी तरह
तुम हो या आइना है तुम्हारी तरह ,
ज़ेरेलब गुनगुनाती हुई हर कली
आज नगमा सारा है तुम्हारी तरह । ।
आग ख्वाबों में लगी है इन दिनों
रौशनी ही रौशनी है इन दिनों
दर्द का सूरज चमकता ही नहीं
बर्फ आँखों में जमी है इन दिनों । ।
हाजी हसन अली हसन
धानी धरती छत्तीसगढ़ जिस तरह अपनी हरियाली, अपनी खेती के लिए मशहूर है, वन, खनिज, प्राकृतिक संपदाओं से भरपूर है यहाँ का रहन-सहन,खान-पान, भाषा -बोली, हंसी-ठिठोली,लोक गीत, साहित्य संस्कृति पूरी दुनिया में प्रसिद्द है , ठीक उसी तरह हमारे यहाँ बहुत सारी महान विभूतियाँ हुईं जिनका मूल्याङ्कन छत्तीसगढ़ बनने के बाद से किया जा रहा है । ऐसे ही एक विभूति थे मुस्लिम संप्रदाय के रहनुमा हाजी हसन अली ।
हाजी हसन अली हसन का जन्म आज ही के दिन यानि 2 अक्तूबर सन 1913 को रायपुर में हुआ था। आपके पिता डी बी खमिसा एक अच्छे शायर रहे और आपकी माताजी सक़ीना बानो को समाज सेवा करने में ख़ुशी होती थी अतः शायरी और समाज सेवा यह दोनों आपको विरासत में मिली। आपकी शिक्षा दीक्षा उर्दू माध्यम से हुई और आपने बी ए तक की डिग्री हासिल की । उर्दू की सेवा करते हुए आपने उर्दू जैसे कठिन लिपि और ज़बान को लोगों तक पहुंचाने के लिए सरल और सुगम तरीक़ा अपनाकर --उर्दू कैसे सीखें, हिंदी से उर्दू सीखें, और लिखना -पढ़ना उर्दू कैसे सीखें जैसी क्किताबें लिखीं जो की हिंदी और उर्दू दोनों के लिए रह आसन हो सके
आप समाज सेवा के क्षेत्र में भी सक्रिय रहे । अंजुमने पंजतनी के आप अध्यक्ष रहे और सद्र की हैसियत से आपने आल इंडिया उर्दू कांफ्रेंस कार्यान्वित किया । उर्दू की खिदमत करने उसे बढ़ावा देने -प्रसार करने के लिये आपने 1972 में मदरसा स्कूल की बुनियाद रखने के साथ ही ग़रीबों और पिछड़े वर्गों की हौसला अफजाई के लिए ईनाम देने की भी शुरुआत की । समाज सेवा और उर्दू की सेवा करने के लिए आपको कई सम्मान मिले जिनमे--महाफ़िज़े उर्दू, अदबे उर्दू, उर्दू रत्न, रहे उर्दू, उर्दू की जान और शान आदि थे।आपने हमेशा कवियों एवं शायरों की हौसला अफजाई करते रहे । आप समझते थे की उर्दू केवल मुसलमानों की ज़बान नहीं बल्कि हिंदुस्तान की भी ज़बान है . आप वतन परस्ती और क़ौम की ख़िदमत में रहे उर्दू के लिए आजीवन फ़िक्रमंद रहे । आपके चार पुत्र और तीन पुत्रियाँ थीं ।
पुत्र इनायत अली छत्तीसगढ़ राज्य अल्प संख्यक आयोग के अध्यक्ष रहे ..और हाजी मोहसिन अली सुहैल अंतर्राष्ट्रीय शायर वरिष्ठ पत्रकार हैं और आपकी रचनाओं को समाज के आगे लेन का अभिनव कार्य कर रहे हैं । कहीं धूप कहीं छाँवऔर मिरास -ए -हसन आपकी ग़ज़लों,नज़्म,क़तआत,अशआर की दो किताबें उन्होंने प्रकाशित की है ।
छत्तीसगढ़ सरकार ने उर्दू अदब के प्रचार-प्रसार के लिए छत्तीसगढ़ के शायरों और अदीबों को हाजी हसन अली सम्मान से प्रतिवर्ष राज्य स्थापना दिवस पर दो लाख के सम्मान से सम्मानित करती है ।
आपके चंद अशआर, नज़्म ----
पैदा हुए हैं हम तो मोहब्बत के वास्ते
हम ज़िन्दगी लुटाएंगे भारत के वास्ते ।\
कौन जलवानुमा है तुम्हारी तरह
तुम हो या आइना है तुम्हारी तरह ,
ज़ेरेलब गुनगुनाती हुई हर कली
आज नगमा सारा है तुम्हारी तरह । ।
आग ख्वाबों में लगी है इन दिनों
रौशनी ही रौशनी है इन दिनों
दर्द का सूरज चमकता ही नहीं
बर्फ आँखों में जमी है इन दिनों । ।
Sunday, August 11, 2013
छत्तीसगढ़ की प्रथम महिला सांसद स्व. मिनी माता के 41 वाँ स्मृति दिवस समारोह आज 11 अगस्त को प्रदेश में बड़ी धूमधाम से मनाया गया। ।इस अवसर पर प्रदेश की विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिभाशाली महिलाओं का सम्मान किया गया -----इस अवसर पर आज गुरु घासीदास साहित्य एवं संस्कृति अकादमी,रायपुर (छ.ग.) द्वारा कृषि राज्य मंत्री भारत सरकार मान. डॉ. चरणदास महंत जी एवं महापौर डॉ किरणमयी नायक के करकमलों से साहित्य और पत्रकारिता के लिए शकुंतला तरार (मेरा सम्मान) चिकिसा के क्षेत्र से डॉ पद्मिनी सोनवानी, समाज सेवा से डॉ शुभांगी आप्टे का सम्मान किया गया
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Wednesday, August 7, 2013
सावन के छै दोहे------------
1 - सावन की लगे झरी, बरसे नेह फुहार
रूठ गए मोसे पिया ,फीकी लगे फुहार
2 - युग युग से बरस रहे, ले बूंदन के हार
पिया बसे परदेस में, फीकी लगे फुहार
3 - झूले बंध गए अमुवा, रिमझिम रस के हार
नेह झरे जियरा जरे. फीकी लगे फुहार
4 -नेह भरा अनुबंध है, अनुबंधी सिंगार
आँख मिचौली सावनी, फीकी लगे फुहार
5 - टूटा छप्पर भीगा मन, आफत बरसे द्वार
धुंधलाई आँखों से, फीकी लगे फुहार
6 - सखियाँ मिल किलोल करें, मन के खुले किवार
आवारा सावन हुआ] फीकी लगे फुहार शकुंतला तरार
Tuesday, July 30, 2013
छत्तीसगढ़ के रामगिरी पर्वत स्थित सीता बेंगरा और जोगी मारा की गुफाएं जहाँ विश्व की सबसे प्राचीनतम नाट्यशाला है। …यहीं सम्राट अशोक के समय के दो भित्तिलेख हैं जो पाली अक्षर में अंकित हैं जिसमे देवदासी सुतनुखा द्वारा बनारस के देवीदीन नामक रूपदक्ष के प्रणय निवेदन को अस्वीकार करने पर कवि द्वारा लिखी गई है। ।सथ ही यह वह ऐतिहासिक जगह है जहाँ महाकवि कालिदास ने मेघदूतम की रचना की थी >…… शकुंतला तरार
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