रूप और सुगंध से रहित फूल
प्रो कोलाकालूरी ENOCH
पूर्व
कुलपति
(Vice-Chancellor): तिरुपति स्थित प्रसिद्ध
श्री वेंकटेश्वर विश्वविद्यालय
श्री कृष्णदेवराय विश्वविद्यालय (SK University) के पूर्व
प्रिंसिपल, यूजीसी (UGC) के मानद प्रोफेसर और नई
दिल्ली साहित्य अकादमी के 'राइटर इन रेजीडेंस' अनंतपुर
प्रो. कोलाकालूरी एनोच जिन्होंने अपनी तेलुगु से हिंदी अनुवाद की कविता मुझे हल्बी में अनुवाद करने को दिया था
हिंदी से हल्बी अनुवाद
अनुवादक :- शकुंतला तरार -
-1-
भारत फूलों का इंद्रधनुष है लेकिन
इसकी सुगंध मुझसे दूर रहती है।
भारत में दिव्य रोटी, पेय और घर का आनंद मिलता है, लेकिन यह
मेरी भूख, प्यास और आश्रय को करने में विफल रहता है।
मैं आपकी सहानुभूति के लिए तरसता
रहा लेकिन आपने मुझे बहिष्कृत
कहने के लिए हाशिये पर,
किनारे पर धकेल दिया है
“रूप आरू खुसबू बिगर फूल”
भारत फूलमन चो इंदरधनऊ आय मांतर
एचो मंगमंगासी मचो ले लाफी रहेसे
भारत ने नंगत रोटी, पिवतो जिनिस आरू घरे रतो चो हरिक मिरेसे , मांतर ए
मचो भूक, पियास आरू रतो चो कुड़िया
के
बनाऊक नी सके |
मयं तुमचो लाड़ काजे अफारते रलें
मांतर तुमी मके घुचातो काजे
बलले कठा, कठा
ढेकलुन दिलास
मुझे आपके घर में प्यार के फल की आशा
थी
परन्तु तूने मुझे एकान्त में कैद कर रखा
है।
इस अलगाव के बच्चे का पिता कौन है?
और अस्पृश्यता?
एक सामाजिक धोखाधड़ी?
एक सामाजिक धोखाधड़ी?
एक राष्ट्रीय त्रासदी?
एक मानवीय शर्म?
मके तुमचो घरे मया चो पाक फर चो आस
रली
मांतर तुमी मके एकलाय बंधन करून
राखलास |
ए अलगालो पिला चो बाप कोन आय ?
आरू छियालाता ?
आरू समाज ने धोका देतोर ?
गोटोक राष्ट्रीय बिपति ?
गोटोक मनुख होतो चो लाज ?
छुआछूत के जन्म पर देवता
चुप रहे हैं, लेकिन मनुष्य
मुखर रहे हैं। अगर यह असत्य नहीं
होता तो ब्रह्मा को अपनी
दुकान बंद कर देनी चाहिए थी।
क्या आपने उत्पीड़न
शापित अस्पृश्यता
और वंचना,
पीड़ादायक अलगाव
और निंदा से
उत्पन्न अत्याधिक पीड़ा का एहसास किया
है?
छियालाता चो जनम होलो ने देव धामी
ओगाय रला , मान्तर मनुख
गोठियालासत | जे ए असत नी
होती जाले बरमा के आपलो
दुकान के बंद करतो रली
काय तुमी डंड
सरापलो छियालाता
आरू ठगा धंदा,
ने होतोर दुःख पीरा
अलग करतो चो डंड आरू निंदा
ने जनमलो खूबे दुःख के समंझलासाहास ?
सदियों से भारत पर या
तो विदेशियों ने लूटपाट करने
के लिए शासन किया या भारतीयों ने
कमजोर और नम्र लोगों को अपमानित
करने, बांटने और राज करने
के लिए शासन किया। उन्होंने कभी भी भारत
को मानवीय नहीं बनाया, कभी भी भारतीयों
को सम्मान नहीं दिया।
कितरोय सौ बरख चो भारत ने
जे बिदेसी मन लूटपाट करतो
काजे सासन करला नाहाले भारत चो मनुख मन के
कमजोर आरू सोज मनुख के टेचराउन
बाटतो आरू राज करतो
काजे सासन करला | हुनमन केभय बले भारत
के मनुख रतो बरन नी बनाला , कभी बले भारतीय मन के
मान नी दिला |
इस समृद्ध, उपजाऊ मिट्टी पर
अस्पृश्यता बेरोकटोक पनपती रही।
मानवता शर्मसार!
कौन पूर्ववत करेगा
अमानवीयकरण का ऐतिहासिक दोष?
हमें मालूम था
हमारे पूर्वजों ने समाज को विभाजित किया
और मानवता को दूर किया
क्या यह हमारा कर्तव्य नहीं है कि हम
गलत को सुधारें,
मानवता को अपनाएं,
ए समरत , उबजातोर माटी ने
छुआछूत बिन बाधा चो पोडराउन गेली |
मनुख जीवना लाज ने मरे
कोन लेताय बरन चो करे
मनुख नी होतोर चो लेताय जुग चो दोस ?
हामी जानते रलूँ
आमचो सियानमन समाज के बाटून दिला आरू
मनुख जीवना के लाफी करला
काय ए आमचो कर्तब्य नुहाय कि आमी गलती के सुधारुंदे
मनुख जीवना के आपलो बनावा |
-4-
भविष्य को उज्ज्वल करने के लिए?
एकजुट होकर हम बचे
भविष्य को उज्ज्वल करने के लिए?
एकजुट होकर हम जीवित रहेंगे,
विभाजित होकर हम नष्ट हो जाएंगे
जीवित रहने
के लिए "भारतीय जातियों को नष्ट
करो और भारतीय धन वितरित करो।"
यदि ऐसा
नहीं हुआ तो परेशानियां
और अशांति बनी रहेगी।
भविस के उजर करतो काजे ?
संगे जुहुन आमी बाचूँ
भविस के उजर करतो काजे ?
संगे जुहुन आमी जीवते रहूँदे,
बाटा होउन आमी नसट होउन जाऊँदे
जीवना रतो काजे
“भारत चो जातमन के नसट
करा आरू भारत चो धन के बाटून दिहा |”
जे असन
नी होली जाले परिसानी
आरू असान्ति बनू रहेदे |
पीड़ितों और पीड़ितों
के गठबंधन से सावधान रहें!
एक बार आग लग जाने पर, यदि
उसे बुझाया न जाए तो वह
पूरे कपड़े को अपनी चपेट में ले लेती
है।
दुखी मनुख आरू दुखी मन
चो गठजोड़ा ले साचेत राहा !
एक हार आईग बरून गेले, जे
हुनके नी बुताले हुन
जमाय कपड़ा के जराउन दयेसे |
भारत इंद्रधनुष के फूलों के असंख्य गुच्छों
की माला है।
यदि फूलों के गुच्छे बिखर कर बिखर जाएं
और अनेक राष्ट्र उभर आएं,
जो हमारे अस्तित्व को सदैव के लिए चुनौती
दे देंगे।
प्रिय बहनों और भाइयों
आने वाले खतरे से सावधान रहें
इसका इलाज प्यार में है
"भारतीयों को खुशी से जीने के लिए
प्यार करो।"
भारत विभिन्न रंगों के पुष्प-गुच्छों
का समूह है।
अनंत आनंद की प्रचुर सुगंध
का आनंद लें।
भारत इंदरधनऊ फूलमन चो खूबे असन गोछा
आय |
जे फूलमन चो गोछा बिखरून-बिखरून
जायदे आरू कितरोय देस ऊपरे एवत,
जे आमचो अस्तित्व के सदा काजे
ललकारून देदे
लाडरी बईन मन आरू भाई मन
एतो बीती खतरा ले हुसियार राहा
एचो इलाज मया ने आसे
"भारतीय मन के हरीक ने जीवतो
काजे मया करा |”
भारत अलग-अलग रंग चो फूल चो गोछा
चो गोहड़ी आय |
खूबे हरीक उदीम चो मंगमंगासी
चो खुसी मनावाँ |
हिंदी से हल्बी अनुवाद ----शकुंतला
तरार
प्लाट नं-32, सेक्टर-2, एकता नगर,
गुढ़ियारी, रायपुर (छ.ग.)पिन-492009

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