Tuesday, February 28, 2017

Thursday, December 22, 2016

साहित्य अकादमी का भाषा सम्मान

श्री हरिहर वैष्णव को साहित्य अकादमी का भाषा सम्मान ------बधाई
कथाकार एवं कवि मूलसृजन कर्म केवल बस्तर पर केन्द्रित बस्तर की लोकभाषाओं (हल्बी, भतरी एवं बस्तरी) के जानकार श्री हरिहर वैष्णव को साहित्य अकादमी दिल्ली का भाषा सम्मान --
आपकी प्रकाशित कृतियों में से हैं -1-मौखिक कथाएँ (लोक साहित्य, बस्तर की विभिन्न लोकभाषाओं की लोक कथाएँ उनके हिन्दी अनुवाद के साथ, बस्तर सम्भाग हल्बी साहित्य परिषद्, कोंडागाँव, 1991), 02. मोहभंग (कहानी-संग्रह, राष्ट्रीय प्रकाशन मन्दिर, लखनऊ, 1997), 03. राजा और बेल कन्या (लोक साहित्य, हल्बी लोक कथा का हिन्दी अनुवाद, साक्षरता समिति, दुर्ग, 1998), 04. चलो, चलें बस्तर (बाल साहित्य, हिन्दी, बस्तर सम्भाग हल्बी साहित्य परिषद्, कोंडागाँव, 2002), 05. बस्तर के तीज-त्यौहार (बाल साहित्य, हिन्दी, बस्तर सम्भाग हल्बी साहित्य परिषद्, कोंडागाँव, 2002), 06. गुरुमाय सुकदई कोराम द्वारा प्रस्तुत लछमी जगार (लोक साहित्य, बस्तर के लोक महाकाव्य का संक्षेपित संस्करण, हल्बी-हिन्दी-अँग्रेजी में, ककसाड़ प्रकाशन, कोंडागाँव, 2003), 07. बस्तर का लोक साहित्य (लोक साहित्य, बस्तर की विभिन्न लोकभाषाओं का लोक साहित्य उनके हिन्दी अनुवाद के साथ, ककसाड़ प्रकाशन, कोंडागाँव, 2003), 08. बस्तर की गीति कथाएँ (लोक साहित्य, बस्तर की विभिन्न लोकभाषाओं की गीति कथाएँ उनके हिन्दी अनुवाद के साथ, बस्तर सम्भाग हल्बी साहित्य परिषद्, कोंडागाँव, 2004), 09. गुरुमाय केलमनी द्वारा प्रस्तुत धनकुल (लोक साहित्य, बस्तर का लोक महाकाव्य, मूल हल्बी एवं हिन्दी अनुवाद, बस्तर सम्भाग हल्बी साहित्य परिषद्, कोंडागाँव, 2008), 10. बस्तर के धनकुल गीत (लोक साहित्य पर शोध विनिबन्ध, दक्षिण-मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, नागपुर, 2008), 11. बस्तर की लोक कथाएँ (लोक साहित्य, बस्तर की विभिन्न लोकभाषाओं की लोक कथाएँ उनके हिन्दी अनुवाद के साथ, नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया, नयी दिल्ली, 2013, 2014), 12. बस्तर का आदिवासी एवं लोक संगीत (लोक संस्कृति, बस्तर की विभिन्न लोकभाषाओं के लोक गीत उनके हिन्दी अनुवाद के साथ, नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया, नयी दिल्ली, 2013, 2015), 13. साहित्य ऋषि लाला जगदलपुरी : लाला जगदलपुरी समग्र (यश पब्लिकेशन्स, नयी दिल्ली, 2014), 14. बस्तर की आदिवासी एवं लोक हस्तशिल्प परम्परा (राधाकृष्ण प्रकाशन, नयी दिल्ली, 2014), 15. धातुशिल्पी डॉ. जयदेव बघेल : एक शिखर यात्रा (लोक कलाकार की जीवनी, राधाकृष्ण प्रकाशन, नयी दिल्ली, 2014), 16. तीजा जगार (लोक साहित्य, मूल हल्बी एवं हिन्दी अनुवाद, भारतीय ज्ञानपीठ, नयी दिल्ली, 2014), 17. सुमिनबाई बिसेन द्वारा प्रस्तुत छत्तीसगढ़ी लोक गाथा : धनकुल (लोक साहित्य, मूल छत्तीसगढ़ी के साथ हिन्दी अनुवाद, छत्तीसगढ़ राज्य हिन्दी ग्रन्थ अकादमी, रायपुर, 2014), 18. बस्तर की भतरी लोक कथाएँ (लोक साहित्य, मूल भतरी के साथ हिन्दी अनुवाद, नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया, नयी दिल्ली, 2015), 19. गुरुमाय केलमनी द्वारा प्रस्तुत बस्तर की धान्य-देवी की महागाथा : लछमी जगार (लोक साहित्य, मूल हल्बी के साथ हिन्दी अनुवाद, साहित्य अकादेमी, नयी दिल्ली, 2015), 20. अन्धकार का देश (श्री सोनसिंह पुजारी की हल्बी कविताओं का हिन्दी अनुवाद मूल सहित, साहित्य अकादेमी, नयी दिल्ली, 2015)

Saturday, October 8, 2016

स्तम्भ लेखक संगोष्ठी-लखनऊ

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, प्रचार विभाग
स्तम्भ लेखक संगोष्ठी
24-25 सितंबर
विषय:- भारत की भारतीय अवधारणा बनाम भारत की अभारतीय अवधारणा


लखनऊ/ राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ द्वारा आयोजित स्तम्भ लेखक संगोष्ठी का उद्घाटन संघ के  अखिल भारतीय पदाधिकारियों, चिंतकों, विचारकों एवं देश के विभिन्न भागों से आये हुए स्तम्भ लेखकों की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ | उद्घाटन सत्र के दौरान जे नन्द कुमार जी द्वारा कार्यक्रम में उपस्थित संघ के वरिष्ठ सम्मानित पदाधिकारियों का परिचय कराया गया जिनमें सम्मानित अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य  मार्गदर्शक  मधुभाई कुलकर्णी जी, अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख डॉ. मनमोहन वैद्य जी, मिलिंद जी, डॉ. प्रदीप कुठ्यागत जी, जगदीश उपासने जी, नरेंद्र कुमार ठाकुर जी, नरेन्द्र जी  प्रचार प्रमुख मध्य क्षेत्र, छत्तीसगढ़, कृपाशंकर जी, राजेंद्र सक्सेना जी, प्रसन्न देशपांडे जी, विनायक जी, सतीश जी आदि थे |
 उदघाटन सत्र के पश्चात् वैचारिक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए डॉ. मनमोहन वैद्य जी ने कहा कि संगोष्ठी का उद्देश्य राष्ट्रीय जागरण के विषयों का प्रचार प्रसार करने के लिए  देश भर से ऐसे स्तम्भ लेखकों के साथ विचार विमर्श करना, उनके साथ एक दृष्टिकोण निर्मित करना है | ऐसे लेखकों को जिनका पाठकों में स्थान है उनके माध्यम से वैचारिक बातें जो देश हित से जुडी हुई हैं जिन विषयों पर लेखों का अभाव है यह विचार समाज तक पहुंचे  यही हमारे संगोष्ठी का उद्देश्य है |

संगोष्ठी में राष्ट्र जागरण के निमित्त समाज में जागरूकता  किस तरह से लाया जाय आदि तथ्यपरक बातों पर विचार करने के साथ ही आर्थिक, सामजिक संरचना, राजनैतिक, इतिहास आदि  अलग-अलग विषयों पर 8 सत्र हुए और लगभग प्रति दो सत्रों के बाद प्रश्नोत्तरी का  कार्यक्रम भी रखा गया था जिससे आगंतुक स्तंभ लेखकों की जिज्ञासाओं का समाधान  किया जा सके|
कार्यक्रम के दौरान स्तम्भ लेखकों के प्रचार विभाग द्वारा गत वर्ष जयपुर राजस्थान में आयोजित महिला विषयक भारतीय दृष्टिकोण विषय पर केन्द्रित राष्ट्रीय संगोष्ठी में विद्वान और विदुषियों द्वारा रखे गए विचारों को “संवर्धिनी” के नाम से पुस्तकाकार स्वरूप प्रदान किया गया था, का विमोचन मंचस्थ अतिथियों द्वारा किया गया | पुस्तक का संपादन नरेंद्र ठाकुर जी ने किया है, प्रकाशन विचार विनिमय नई दिल्ली ने किया है | कार्यक्रम में पत्रकारिता से जुड़े विभिन्न राज्यों से लगभग 250 से अधिक स्तम्भ लेखकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज की | कार्यक्रम का संचालन नन्द कुमार जी ने किया | जय भारत , जय जननी, वन्दे मातरम
शकुंतला तरार 
प्लाट न- 32 , सेक्टर-2, 
एकता नगर, गुढ़ियारी, 
रायपुर (छत्तीसगढ़) मो – 9425525681  

Thursday, October 6, 2016

-सर्जिकल स्ट्राइक पर राजनीति दुर्भाग्यपूर्ण

सर्जिकल स्ट्राइक पर राजनीति दुर्भाग्यपूर्ण 
      उरी में हुए आतंकवादी हमले में भारत के 18 जवानों की शहादत के खिलाफ भारत का सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम देना देश के लिए गौरव की बात है किन्तु, कुछ सिरफिरे  लोगों द्वारा यह नागवार गुजरा कि इतने कम समय में हमारे प्रधान मंत्री ने यह सब कैसे कर दिखाया है और वे लगे इसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाने | उनकी इस घिनौनी हरकत से देश लज्जित ही नहीं हो रहा है बल्कि बाहरी दुनिया में भीतर की  लड़ाई से शर्मिंदा भी हो रहा है | आज देश के  समर्थन में जहां विश्व के लगभग सभी बड़े देश आगे आ रहे हैं और इस सर्जिकल स्ट्राइक को सही ठहरा रहे हैं, ऐसे समय जब भारत आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता की अपेक्षा करता है अपने ही घर के भेदी ओछी राजनीति पर उतर आए हैं | वे कम से कम देश  की अस्मिता  और देश के तीनों सेनाओं  के जवानों के देश के प्रति समर्पण की भावना को तो बख्श देते |
एक तरफ कांग्रेस के लाडले पप्पू प्रधान मंत्री की तारीफ  करते हैं वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के ही अन्य पदाधिकारी उनकी विश्वसनीयता को  संदेह की नज़रों से देखते हैं | राष्ट्रीय हित के मुद्दों पर  विपक्ष राजनीति करना चाह रही है| राजनीति कभी भी देश से सर्वोपरि नहीं हो सकता |
सेना के डी जी एम ओ लेफ्टिनेंट जनरल रणवीर सिंह ने स्वयं मीडिया को सर्जिकल स्ट्राइक की  जानकारी दी उसके बाद भी नेता हमारे सबूत मांग रहे हैं| पूरी दुनिया के सामने आज पाकिस्तान अलग-थलग पड़ गया है ऐसे समय में इन नेताओं की गलत बयानबाजी जवानों के मनोबल को कम कर सकता है | दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल तो पाकिस्तान में हीरो बन गए हैं क्या उन्हें अपने देश की सेना से ज्यादा आतंकवादियों पर भरोसा है | ऐसे  ही लोगों के उटपटांग बयान से  देश की सुरक्षा को खतरा उत्पन्न होता है-
हमें तो अपनों ने लूटा गैरों में कहाँ दम था,
हमारी कश्ती वहाँ  डूबी जहां पानी कम था |
यह वो समय है जब पूरा देश एक ही स्वर में स्वर मिला कर खड़ा हो गया है तब ऐसा अनर्गल प्रलाप केवल कुछ राजनेताओं को ही शोभा देता है| हमें दुश्मनों की क्या आवश्यकता, हमारे ही घर में तो दुश्मनों की लम्बी जमात है | दुनिया भर के देशों की नफ़रत और धिक्कार से आहत और बेहोश हुए पाकिस्तान को हमारे नेता संजीवनी  बूटी सूंघा रहे हैं, अपने शब्दों की चाशनी से  पाकिस्तान पर मरहम लगा रहे हैं | ऐसे लोग  देश हित की नहीं स्व हित की बात सोचते हैं | ऐसे जयचंदों को लोगों ने सर पर बिठाकर रखा है |
दरअसल सेना के सर्जिकल स्ट्राइक को देखने की चाहत ने इन्हें अँधा कर दिया है ये देखना चाहते हैं की किस तरह से यह हमला किया जाता है | उसे देखने की जिज्ञासा उनकी चाहत ने, लोलुपता संवरण न कर सकने की स्थिति में संदेह की दृष्टि से देखने का नाटक कर रहे हैं ताकि उनके कहने पर इसका प्रसारण चैनलों में किया जा सके और ये उस दृश्य को  महसूस कर सकें |
कुछ बातें देश हित में सर्वोपरि होती है,  देश की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को, मिशन को गुप्त ही रखा जाना श्रेयस्कर होता है अन्यथा सेना की निजता को खतरा उत्पन्न हो सकता है, उनका मनोबल कमजोर पड़ सकता है | अतः हमें सावधान रहना पड़ेगा अपने ही भीतरघाती उन जयचंदों से देश को बचाने के लिए | हमारे सैनिकों की शहादत कभी व्यर्थ नहीं जाएगी  पहले देश है फिर विद्वेष --- जय भारत , जय जननी, वन्दे मातरम

शकुंतला तरार 
प्लाट न- 32 , सेक्टर-2, 
एकता नगर, गुढ़ियारी, 
रायपुर (छत्तीसगढ़) मो – 9425525681  

Thursday, August 25, 2016