Sunday, July 23, 2017

गीत-फूल नहीं मुरझाते वे जो हरदम मुस्काते रहते

गीत
6-7-2017
फूल नहीं मुरझाते वे जो
हरदम मुस्काते रहते |
चाहे कितनी पीड़ा मन में
किन्तु महक हैं बगराते ||
1-झीनी झीनी रात चदरिया
भीगा-भीगा मन महका
शबनम के रज-कण बनकर
वह प्रातः दूर्वा पर बहका
नेह लुटाती रजनी मधुमय
भोर मुहाने थामे रहते ||
फूल नहीं मुरझाते वे जो
हरदम मुस्काते रहते |
2-भावों के पाखी अम्बर में
चंचु वीणा के मधु स्वर हैं
बेड़ियों से आज़ाद नीलांचल
नाप रहा जो वेणुधर है
आज तुम्हारे नीलकंठ में
अमरबंध भर गाते रहते ||

Wednesday, July 19, 2017

गीत- सावन ने ली है अंगड़ाई -शकुंतला तरार

गीत- सावन ने ली है अंगड़ाई -शकुंतला तरार

 गीत
“सावन ने ली है अंगड़ाई”
छम-छम-छम-छम स्नेह झर रहे
सावन ने ली है अंगडाई,
बादल के गजरे गुंथवाकर
प्यासी धरती हरषाई ||
1-अलकों में पलकों की छाया
सांझ सवेरा ज्यूँ मिलते
अपने ही सपनों के उपवन
गीले छप्पर में खिलते
टहनी-टहनी डाली-डाली
नव पल्लव भी इठलाई ||
2-चिड़ियों के पर गीले-गीले
अखबारों सा भीगा मन
एहसासों की झड़ी सुहानी
पल-छिन ,पल-छिन सीला तन
बिम्ब कल्पनाओं के भीगे
धूप की बगिया खिल आई ||
3-जीवन क्या है अर्थ भेद क्या
इस मौसम ने समझाया
श्यामल मृदुल कालिंदी है
चाँद उतर नभ से आया
निंदियारी पलकों से छनकर
पर्णकुटी भी मुस्काई ||
शकुंतला तरार रायपुर छत्तीसगढ़

Tuesday, February 28, 2017